सिंगापुर से सबक ले दिल्ली सरकार

सिंगापुर ने अपनी सड़कों पर अगले दो सालों तक नई कारों और मोटर साइकलों को परमिट देने पर रोक लगा दी है। यह रोक इस साल फरवरी से प्रभावी होगी। इस दौरान ए, बी और डी श्रेणी के वाहनों को परमिट नहीं दिए जायेगे। सिर्फ बसों और ट्रांसपोर्ट वाहनों को ही परमिट मिल सकेंगे। वर्ष 2020 में वाहनों की स्थिति के आधार पर इस नीति पर दोबारा विचार किया जाएगा। सिंगापुर में वाहन का लाइसेंस प्राप्त करना दुनिया में सबसे महंगा है। न्यूयार्क सिटी से कम क्षेत्रफल वाले देश सिंगापुर की बारह प्रतिशत भूमि पर सड़के बनी है। सीमित भूमि होने के कारण और सड़के बनाने की गुंजायश नहीं है। सिंगापुर के सड़क नेटवर्क को काफी अच्छा माना जाता है।

नई दिल्ली के प्रगति मैदान में शनिवार को 26 वे अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले की शुरुआत हुई। इस बार पुस्तक मेले का विषय पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन रखा गया है। मेले में ग्लोबल वार्मिंग, जल प्रदूषण और पर्यावरण से संबंधित अन्य विषयों पर खासतौर पर फोकस रहेगा। नौ दिन तक चलने वाले मेले के उद्घाटन समारोह को मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सम्बोधित किया। इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका सुनीता नारायण ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के परिणाम अत्याधिक सर्दी, अत्याधिक सूखे और अत्याधिक बरसात के रूप में सामने आ रहे है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर सबसे गरीब पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है। सुनीता नारायण ने भी जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए कारों की संख्या को सीमित करने का सुझाव दिया।

दिल्ली की गिनती आज दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में होती है। सड़क पर वाहनों की गिनती को कम करने के लिए ओड इवन के फार्मूले का प्रयोग एक बार किया जा चुका है। इस साल फार्मूले की उपयोगिता पर एनजीटी द्वारा सवाल उठाने के बाद लागुलागू नहीं किया गया। आपसी सिर फुटौवल में मशगूल दिल्ली सरकार सिंगापुर और पुस्तक मेले से कोई सीख लेकर लोगों की मुश्किलें कम करने की राह पर चल सकती है।

अमित यायावर

aakritipr@gmail.com

 

 

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