भारतीय कूटनीति की सफलता का चरम है रामल्लाह

रामल्लाह भारतीय कूटनीति और विदेश नीति की सफलता का चरम है। फिलिस्तीन की आजादी की लड़ाई से भारत की प्रतिबद्धता पुरानी है। लेकिन नरेंद्र मोदी फिलिस्तीन की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री है। मोदी को फिलिस्तीन ने अपने सर्वोच्च सम्मान ग्रेंड कॉलर आफ स्टेट से नवाजा है। अभी तक आजादी के सत्तर साल में भारत का कोई प्रधानमंत्री न इजरायल गया और न ही फिलिस्तीन। जाने कैसी विदेश नीति को अपनाए हुए थे हम ? नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ दोनों परस्पर विरोधी देशों का दौरा किया अपितु अपने निजी प्रभाव का प्रदर्शन भी किया।

अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के नए आयाम देखिए। इजरायल भारत की रक्षा और तकनीकी मामलों में मदद कर रहा है। भारत फिलिस्तीन में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के साथ युवाओं की शिक्षा में सहायता कर रहा है। यूएनओ में येरूसलम के मुद्दे पर भारत ने फिलिस्तीन के हक़ में और इजरायल के खिलाफ वोट दिया था। इसके बाद भी भारत दोनों देशों का प्यारा है। कूटनीति की यह धार सिर्फ भारत के पास ही है। इसके पीछे हमारी आर्थिक और सैनिक ताकत का भी बड़ा हाथ है। आने वाले कुछ सालों में हमारी अर्थ व्यवस्था ब्रिटेन और फ़्रांस से आगे निकल जाने वाली है।

रामल्लाह पहुंचने पर नरेंद्र मोदी ने फलीस्तीनी नेता यासर अराफात की मजार पर जाकर चादर चढ़ाई। उन्होंने फिलिस्तीन के विकास के लिए चालीस मिलियन डालर की मदद देने की घोषणा भी की। उन्होंने फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास से आपसी और वैश्विक मामलों पर बातचीत भी की। बाद में मीडिया से बात करते हुए मोदी ने कहा कि फिलिस्तीन से संबंधों को नवीनता प्रदान करते हुए उन्हें ख़ुशी हो रही है। मोदी ने फिलिस्तीन के शांतिपूर्ण ढंग से सम्प्रभू देश बनने की कामना भी की। मोदी की ताज़ा यात्रा में खाड़ी के तीन देशों का शामिल होने का एक पहलू आतंकवाद भी है। इन तीनों मुस्लिम देशों से पाकिस्तान से होने वाली आतंकवादियों की घुसपेठ पर भी चर्चा होगी।

अमित यायावर

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