प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक दुनिया के सामने रखा भारत का विजन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डावोस में विश्व आर्थिक मंच के 48 वे सम्मेलन के सामने भारत का विजन रखा। अपने भाषण में मोदी ने भारत की प्राचीन और समृद्ध संस्कृति का विवरण देते हुए वेद, उपनिषद, महात्मा बुद्ध और महात्मा गाँधी के संदर्भ दिए। उन्होंने कहा कि हमारे ग्रंथों में हजारों वर्ष पहले दुनिया को एक परिवार और इंसान को धरती का पुत्र बताया गया था। उन्होंने महात्मा बुद्ध के अपरिग्रह के नियम का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे लालच ने पृथ्वी को बरबादी के मुहाने पर ला खड़ा किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सामने तीन बड़े खतरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और विपरीत वैश्विकरण को दुनिया के लिए खतरनाक बताया। मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण हम अतिशय मौसम स्थितियों का सामना कर रहे है। उन्होंने कहा कि आतंक का अच्छे और बुरे के रूप में विभाजन चिंताजनक है। उन्होंने शिक्षित और समृद्ध युवाओं के आतंक की ओर आकर्षित होने पर भी फ़िक्र जताया। मोदी ने कहा कि कुछ राष्ट्र वैश्विकरण की प्रतिबद्धता के खिलाफ जाकर काम कर रहे है। उन्होंने विश्व के संगठनों के घटते प्रभाव पर भी अफ़सोस जताया।

 

अपने उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि इससे पहले 1997 में भारत के प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा डावोस आए थे। इन इक्कीस वर्षों में भारत की अर्थ व्यवस्था छह गुना बढ़ चुकी है। अब भारत में रेड टेप नहीं रेड कार्पेट का जमाना है। दुनिया भर के निवेशकों और उद्यमियों को भारत में आने का निमंत्रण भी प्रधानमंत्री ने दिया। उन्होंने कहा कि भारत में ही आपको शांति और समृद्धि एक साथ मिल सकती है। उन्होंने कारोबार करने की रैंकिंग में सुधार, जीएसटी और नोटबंदी का भी उल्लेख किया। दार्शनिक अंदाज में दिए गए गंभीर व्याख्यान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ हल्के फुल्के वाक्य भी इस्तेमाल किये।

अमित यायावर

aakritipr@gmail.com

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