National

केजरीवाल के रास्ते पर चल रहे है हार्दिक पटेल

400
0

गुजरात ने पाटीदार आंदोलन के मुखिया हार्दिक पटेल को देश के राजनीतिक पटल पर पहचान दी है। प्रचार अभियान के दौरान देश के लोगों को हार्दिक की सोच और कार्य शैली की झलक मिली है। अभी तक के परिचय में हार्दिक पटेल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के रास्ते पर चलते दिखाई दे रहे है। दोनों नेताओं में बहुत सी समानताएं और असमानताएं है। गुजरात में दूसरे चरण के प्रचार के खत्म होने के बाद हार्दिक और अरविन्द के चरित्र और काम करने के तरीके का तुलनात्मक अध्ययन करके देखते है।

हार्दिक और अरविन्द दोनों ही आंदोलन की कोख से जन्मे है । लेकिन अरविन्द ने अन्ना हजारे के भ्र्ष्टाचार विरोधी आंदोलन से लोकप्रियता हासिल की और अपनी पार्टी बना ली । इसके उलट हार्दिक ने अपने दम पर आरक्षण आंदोलन खड़ा किया और उसे कांग्रेस की झोली में डाल दिया । आंदोलन से जुड़ने से पहले अरविन्द भारतीय सेवा से ऐच्छिक निवृति ले चुके थे। इसके विपरीत हार्दिक आंदोलन के तीन साल बाद भी कानूनन विधान सभा का चुनाव लड़ने के योग्य नहीं हुए है। अरविन्द और हार्दिक के शिक्षा के स्तर में भी भारी अंतर है। इसके बावजूद दोनों में बहुत सी समानताएं है जिनसे लगता है कि हार्दिक अरविन्द के नक्शे कदम पर चल रहे है।

हार्दिक और अरविन्द में सबसे बड़ी समानता उनका अँधा मोदी विरोध है। 2014 के आम चुनाव में नरेंद्र मोदी को हराने के लिए अरविन्द केजरीवाल वाराणसी से उनके खिलाफ मैदान में उतर गए थे। दिल्ली में भारी बहुमत से सरकार बनाने के बाद अरविन्द का एलजी नजीब जंग से टकराव सीधे नरेंद्र मोदी सरकार का विरोध ही था। भाजपा का हर बात पर विरोध करके अरविन्द ने एक तरह से अपना राजनीतिक कैरियर ही चौपट कर लिया है। पंजाब और गोवा के नतीजों के बाद गुजरात जाने की उनकी हिम्मत ही नहीं हुई। हार्दिक पटेल की पूरी राजनीति भी भाजपा और नरेंद्र मोदी के विरोध पर ही टिकी है। वे मतदाताओं से भाजपा को हराने की अपील कर रहे है।

हार्दिक और अरविन्द के चरित्र की एक अन्य प्रमुख समानता उनका अराजक होना है। दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने गणतंत्र दिवस का बहिष्कार करके धरना लगा दिया था। उनके डिप्टी मनीष सिसोदिया भी अफ्रीकन महिलाओं के मामले में ऐसा ही व्यवहार कर चुके है। अरविन्द इस बात को सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी कर चुके है। हार्दिक ने भी दूसरे चरण के प्रचार के खत्म होने से एक दिन पहले बिना अनुमति के रोड शो करके अपने अराजक होने का सबूत दिया है। इतना ही नहीं इस रोड शो के दौरान सरे आम फायरिंग भी की गई थी। पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर हार्दिक ने कहा कि आजाद भारत में उनको किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है।

अरविन्द केजरीवाल की तरह हार्दिक पटेल भी तानाशाह और मगरूर भी है। सत्ता में आने के बाद अरविन्द ने पार्टी पर एकाधिकार रखने के लिए अपने वरिष्ठ साथी प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। हार्दिक भी सबकी सहमति से चलने में विश्वास नहीं रखते। यहीं कारण है कि प्रचार अभियान शुरू होने के साथ ही हार्दिक के दो करीबी साथी वरुण पटेल और रेशमा पटेल उनका साथ छोड़ कर चले गए। इन दोनों नेताओं ने हार्दिक को कांग्रेस का एजेंट भी घोषित कर दिया।

अरविन्द की तरह हार्दिक का भी विवादों से नाता जुड़ता नजर आ रहा है। अरविन्द ने लोगों को स्टिंग करना सिखाया। लोगों ने उनकी और उनके मंत्रिओं की की ही सीडी बना कर जारी कर दी। मंत्री संदीप सिंह की सैक्स सीडी से अरविन्द को काफी शर्मसार होना पड़ा था। एक महीने के प्रचार अभियान के दौरान हार्दिक पर भी खूब सीडी बम्ब गिराए गए। सबसे पहले हार्दिक की होटल में राहुल गाँधी से मिलने की क्लिप सामने आई। उसके बाद कथित रूप से उनकी औरतों के साथ दो सीडी सोशल मीडिया पर डाली गई। महिलाओं के साथ अपनी सीडी के संबंध में हार्दिक ने अलग अलग मौकों पर जुदा बयान दिए।

अमित यायावर

aakritipr@gmail.com

Facebook Comments
Tagged:
1514316716-0915
National
How To Apply Delayed Flights Compensation
amantullah-khan
National
आप ने चीफ सैक्ट्री से मारपीट कर मोल लिया नया विवाद
nirav-modi-protests-afp16218.jpg.image.975.568
National
एनडीए सरकार के गले की फ़ांस बन गया है मोदी गेट
Amit Yayavar

Leave a Reply

Your email address will not be published.

%d bloggers like this: