एनडीए सरकार के गले की फ़ांस बन गया है मोदी गेट

पीएनबी के हजारों करोड़ रुपए का मोदी गेट केंद्र की भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के गले की फ़ांस बन गया है। घोटाला 2011 में यूपीए सरकार के समय शुरू हुआ और 2018 में एनडीए के राज में पकड़ा गया। अब कांग्रेस और भाजपा में घोटाले के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराने की होड़ लगी है। कांग्रेस हरिकृष्ण द्वारा पीएमओ को लिखी चिठ्ठी का हवाला दे रही है। भाजपा इलाहाबाद बैंक के पूर्व डायरेक्टर दिनेश दुबे का जिक्र कर रही है। इस बीच रोटोमैक के विक्रम कोठरी का घोटाला भी साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर गया है। . 

नीरव मोदी और मेहुल चौकसे नए जमाने के नटवर लाल है। इस मामले में कांग्रेस पर कई बड़े सवाल उठ खड़े हुए है। राहुल गाँधी का नीरव की कॉकटेल पार्टी में शामिल होना शक पैदा करता है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवीं की पत्नी अनीता सिंघवीं का नाम नीरव के साथ जोड़ दिया है। एलआईसी द्वारा गीतांजलि में बड़ी हिस्सेदारी खरीदना और सेबी की कार्रवाई का बीच में बिना किसी नतीजे के रुक जाना भी संदेह के घेरे में है। सबसे बड़ा सवाल यहीं है कि यूपीए के राज में शुरू हुआ घोटाला एनडीए के राज में भी कैसे चलता रहा।

सवाल यह भी है कि विजय माल्या के बाद नीरव मोदी भी कैसे सरकारी कार्रवाई शुरू होने से ठीक पहले देश छोड़ कर भागने में कामयाब हो गया। रोटोमैक घोटाला भी नरेंद्र मोदी सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था देने के दावे का मजाक उड़ा रहा है। मनमोहन सिंह की ईमानदारी यूपीए की सरकार को बचाने में नाकाम रही थी। जनता की घारणा चुनावी राजनीति में बड़ी भूमिका रहती है। मोदी सरकार ने यदि समय पर ध्यान नहीं दिया तो उसका हश्र भी यूपीए जैसा होने से कोई रोक नहीं सकेगा।

अमित यायावर

aakritipr@gmail.com

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